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Thursday, 4 February 2016

ऑफलाइन होने पर एसएमएस से चलाएं सोशल साइट

अगर आप कहीं घुमने गए हैं औpaisaplazaर वहां इंटरनेट नहीं चल रहा है तो परेशान होने की जरुरत नहीं। आप चाहें तो एसएमएस की मदद से न सिर्फ अपना फेसबुक स्टेटस अपडेट कर सकते हैं, बल्कि ट्विटर पर देश-दुनिया की हलचल भी जान सकते हैं। जी हां, फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल साइटों ने अपनी तरफ से कुछ मोबाइल नंबर जारी किए हैं जिन पर एसएमएस भेजकर बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी स्टेटस अपडेट किया जा सकता है।

फेसबुक यूजर : एसएमएस से फेसबुक पर ऑफलाइन रहते हुए भी स्टेटस अपडेट किया जा सकता है। वही यूजर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं जिन्होंने अपना मोबाइल नंबर फेसबुक से जोड़ रखा है। स्टेटस अपडेट के लिए उन्हें 9232232665 पर एसएमएस भेजना होता है। इस मैसेज पर वही शुल्क देय होगा जो मोबाइल कंपनियां साधारण एसएमएस पर वसूलती है।
ऐसे जोड़ें नंबर : फेसबुक से मोबाइल नंबर जोड़ने के लिए उसकी ‘सेटिंग’ में जाएं। यहां ‘जनरल सेटिंग’, ‘सिक्योरिटी’ और ‘प्राइवेसी’ के विकल्प मिलेंगे। इन्हीं के नीचे ‘मोबाइल’ का विकल्प दिखाई देगा। इसपर क्लिक करने पर फोन नंबर जोड़ने का विकल्प आएगा। यहां अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें। इसके बाद फेसबुक एक सत्यापन कोड भेजेगा। इसे साइट पर डालने पर आपका मोबाइल नंबर फेसबुक अकाउंट से जुड़ जाएगा।

ट्विटर यूजर : इस माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट से अपना फोन नंबर जोड़ने के बाद ऑफलाइन रहते हुए भी एसएमएस भेजकर लगातार ट्विट पोस्ट किए जा सकते हैं। भारत में ट्विटर से जुड़े नंबर के जरिए आप 9248948837 पर जो भी टेक्स्ट मैसेज भेजेंगे, वह आपकी प्रोफाइल पर ट्विट के रूप में दिखने लगेगा।
ऐसे जोड़े नंबर : ट्विटर अकाउंट से अपना फोन नंबर जोड़ने के लिए ट्विटर की ‘सेटिंग’ में जाएं। यहां एक नया पेज खुलेगा। इसपर बीच में ‘मोबाइल सेटिंग’ का विकल्प नजर आएगा। इसपर जाकर ट्विटर से अपना मोबाइल नंबर जोड़ दें। इसके बाद नीचे की तरफ आपको ‘ट्विटर अलर्ट’, ‘अनाउंसमेंट फ्रॉम ट्विटर’ और ‘फॉलो रिकमेंडेशन’ जैसे विकल्प दिखाई देंगे। इनपर क्लिक करके सेव कर लें। इससे आपको ट्विटर के नोटिफिकेशन फोन पर मिलने लगेंगे।

अगर आप किसी खास ट्विटर अकाउंट से एक भी ट्विट को छोड़ना नहीं चाहते हैं तो आप उस अकाउंट को ‘फेवरेट’ सूची में डाल सकते हैं। इससे संबंधित अकाउंट से जब भी कोई ट्विट पोस्ट किया जाएगा तो आपके मोबाइल पर उसका नोटिफिकेशन आ जाएगा। ऐसा करने के लिए आपको संबंधित यूजर की प्रोफाइल पर जाकर वहां दिए ‘स्टार’ पर क्लिक करना होगा।

Tuesday, 19 January 2016

एप से उठाएं मोबाइल बैंकिंग का फायदा

बैंकिंग में नई तकनीक के इस्तेमाल ने पूरे क्षेत्र को तेजी से बदल कर रख दिया है। आज बैंकिंग के मोबाइल संस्करण ने न सिर्फ बैंकिंग को सुविधाजनक बनाया है बल्कि इसकी पहुंच को भी काफी हद तक बढ़ा दिया है। मोबाइल बैंकिंग के क्षेत्र में निजी क्षेत्र के साथ-साथ सार्वजनिक बैंक भी कदम से कदम मिलाकर साथ चल रहे हैं। इन बैंकिंग एप की मदद से आप कभी भी कहीं भी बैंक की हर सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।
मोबाइल बैंकिंग क्या है : मोबाइल बैंकिंग में आपका खाता हमेशा आपके साथ रहता है। आप मोबाइल बैंकिंग का लाभ कहीं भी कभी भी उठा सकते हैं। मोबाइल बैंकिंग आपके मोबाइल द्वारा SMS के जरिये संचालित होता है।
कैसे चुने सही एप : कई सारे मोबाइल एप और वॉलेट उपलब्ध है। इसमें यह ध्यान देने की बात है कि इनमें से अपने बैंक से लेकर दूसरे बैंक तक में कौन सा एप चुना जाए। यह पूरी तरह से आपके लेन-देन पर निर्भर करता है। देश में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कई बैंक एप की सुविधा प्रदान करते हैं जिसमें अलग-अलग विशेषताएं होती हैं।
एप पर बैंक की सुविधाएं : ICICI बैंक का मोबाइल एप फंड ट्रांसफर, अकाउंट स्टेटमेंट आदि की सुविधा देता है। HDFC बैंक के तीन एप मोबाइलबैंकिंग, चिल्लर और पेजैप हैं। मोबाइलबैंकिंग एप हिंदी में भी उपलब्ध है। चिल्लर थर्ड पार्टी एप है जो आपको अपने अकाउंट से दूसरे नंबर पर पैसा भेजने की अनुमति देता है। अगर दूसरे नंबर के पास यह एप है तो पैसा खाते में खुद ही पहुंच जाएगा और नहीं है तो उसे एक SMS आएगा जिसे डाउनलोड कर राशि मिल सकेगी। यह सेवा किसी भी बैंक के उपभोक्ता ले सकते हैं। एक्सिस बैंक ने भी तीन एप एक्सिस मोबाइल, पिंगपे और लाइम पेश किया है। SBI का बडी एक मोबाइल वॉलेट है। बैंक ऑफ़ इंडिया के दो एप स्टार टोकन एनजी और बीओआई मोबाइल बैंकिंग मूलभूत सुविधाएं प्रदान करता है। पंजाब नेशनल बैंक के एप पीएनबी एमबैंकिंग और पीएनबी मोबीइज भी बैंकिंग सुविधाएं देता है। केनरा बैंक के एप ई-इनफोबुक पासबुक संबंधी अपडेट की जानकारी देते हैं। जबकि केनरा एमवॉलेट एप राशि जमा रखने और बिल भुगतान की सुविधा देता है।

Wednesday, 6 January 2016

यू ट्यूब के खास फीचर से करें समय और डाटा की बचत

विडियो साइट यूट्यूब पर कई ऐसे फीचर हैं जिनके जरिए समय और डाटा बचाने के साथ मजेदार तरीके से विडियो देख सकते हैं। यूट्यूब विडियो को बिना किसी सॉफ्टवेयर या एप से सीधे फोन में डाउनलोड कर सकते हैं। विडियो से एमपी 3 फाइल भी बनाई जा सकती है। यूट्यूब का लुक भी अपनी मर्जी के हिसाब से बदल सकते हैं।
बिना एप करें विडियो डाउनलोड : यूट्यूब विडियो को बिना किसी एप या सॉफ्टवेयर की मदद से डाउनलोड किया जा सकता है। इसके लिए विडियो के यूआरएल में www. के बाद और youtube.com से पहले ss लगा दें। इसके बाद विडियो का यूआरएल www.ssyoutube.com ऐसा दिखेगा। यहां क्लिक कर अलग-अलग क्वालिटी में विडियो डाउनलोड कर पाएंगे।
विडियो शुरू होने का समय सेट करें : विडियो शुरू होने का समय भी एक क्लिक में सेट कर सकते हैं। उदाहरण के लिए किसी विडियो को एक मिनट 20 सेकेंड से देखना चाहते हैं तो इसके यूआरएल के बाद #t=01m20s लगा दें। इसके बाद विडियो खुलने पर एक मिनट 20 सेकेंड से शुरू होगी। इस लिंक को शेयर भी कर सकते हैं।
विडियो बफर होने पर खेलें गेम : इंटरनेट की स्पीड कम होने की वजह से हाई क्वालिटी की विडियो बफर करती है। अगर आपके पास यूट्यूब प्लेयर का न्यू वर्जन है तो विडियो बफर होने के दौरान स्नेक गेम खेल जा सकता है। इसके लिए कीबोर्ड पर दो सेकेंड के लिए बायाँ एरो (←) बटन दबाएं और फिर डाउन एरो (↓) बटन दबाएं।
विडियो की एमपी 3 फाइल बनाएं : यूट्यूब पर मौजूद गानों को एमपी 3 फाइल में कनवर्ट कर डाउनलोड किया जा सकता है। इससे डाटा भी बचता है। इंटरनेट पर कई ऐसी साइट हैं जो विडियो कंप्रेस कर एमपी 3 में बदल देती है। यहां विडियो का यूआरएल डालना होगा। इसके बाद कनवर्ट के विकल्प पर क्लिक कर डाउनलोड कर सकते हैं।
ये साइट बनाती हैं एमपी 3 फाइल :
आकर्षक स्क्रीन पर देखें विडियो : यूट्यूब के ‘लीन बैक’ फीचर में आकर्षक और बड़ी स्क्रीन पर विडियो दिखती है। यहां अन्य चैनलों द्वारा सुझाई विडियो, होम पेज व अन्य भी दिखते हैं। इन्हें इस प्रकार सेट किया गया है कि ये प्ले होने वाली विडियो के ऊपर आते ही बैकग्राउंड में चले जाते हैं। इसके लिए (youtube.com/leanback) पर विजिट कर सकते हैं। इस साइट पर जाते ही यूट्यूब एकदम बदले हुए लुक में दिखाई देगा।

Friday, 25 December 2015

सोशल साइट पर आपत्तिजनक कंटेंट की ऐसे करें रिपोर्ट

सोशल साइट पर ऑनलाइन धोखाधड़ी बढ़ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक फर्जी लिंक के जरिए हर 10वें यूजर के सोशल मीडिया अकाउंट में सेंध लगाने की कोशिश की जाती है। ऐसे में सोशल साइट पर आपत्तिजनक कंटेंट या अकाउंट को रिपोर्ट किया जा सकता है। कंटेंट रिपोर्ट करने का मतलब संबंधित साइट को इसकी जानकारी देना है।
ट्विटर गंभीरता से लेता है शिकायत : माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर रिपोर्ट में कुछ भी आपत्तिजनक पाए जाने पर संबंधित अकाउंट को सस्पेंड भी कर देती है। ट्विटर पर कोई परेशान कर रहा है या धमकी दे रहा है तो रिपोर्ट करने के लिए किसी अकाउंट के दाहिने और दिए गए गोलाकार आइकन पर क्लिक करें। यहां रिपोर्ट का विकल्प मिलेगा। उसपर क्लिक करने पर ट्विटर पूछेगा कि आप इस अकाउंट को क्यों रिपोर्ट करना चाहते हैं। इसके लिए यहां पर पूरी शिकायत लिखकर देने का विकल्प भी दिया गया है।
फेसबुक भी रिपोर्ट नहीं करता नजरअंदाज : फेसबुक पर अगर किसी अकाउंट को रिपोर्ट करना चाहते हैं तो उसकी प्रोफाइल पर जाएं। यहां कवर फोटो के नीचे तीन बिंदुओं का आइकन होगा। इसपर क्लिक करने के बाद ‘Account Block’ और ‘Report’ का विकल्प आएगा। ‘Report Account’ के विकल्प पर जाकर उस व्यक्ति की ओर से शेयर किए गए कंटेंट और उसके अकाउंट को रिपोर्ट कर सकते हैं। किसी व्यक्ति के कंटेंट को रिपोर्ट करते समय फेसबुक कई विकल्प पूछेगा। यहां फोटो, कमेंट टाइमलाइन या किसी भी ग्रुप या पेज पर उस व्यक्ति के कंटेंट को रिपोर्ट करने के बारे में जानकारी देनी होगी। यह भी बताना होगा कि अकाउंट को क्यों रिपोर्ट करना चाहते हैं।
इंस्टाग्राम फोटो पर यूं जताएं आपत्ति : फोटो शेयरिंग वेबसाइट इंस्टाग्राम पर कोई आपत्तिजनक फोटो भेज रहा तो उसे हटा सकते हैं। इसके लिए फोटो के सामने दिए एरो के निशान पर क्लिक करें। यहां रिपोर्ट का विकल्प आएगा। इसपर जाकर रिपोर्ट कर दें।
वाट्सएप पर ब्लॉक की सुविधा : वाट्सएप पर अन्य सोशल साइटों की तरह किसी कंटेंट को रिपोर्ट करने की सुविधा नहीं दी गई है। यानि वाट्सएप पर शेयर होने वाले किसी कंटेंट को हटाने का कोई प्रावधान नहीं है लेकिन गलत चीजें शेयर करने वाले किसी भी यूजर को ब्लॉक किया जा सकता है। एंड्राइड यूजर किसी व्यक्ति को ब्लॉक करना चाहते हैं तो उसकी वाट्सएप प्रोफाइल पर जाएं। यहां नीचे की तरफ सेटिंग में ‘Block User’ का विकल्प दिया गया है। इसपर क्लिक कर दें।

Monday, 21 December 2015

फेसबुक सेटिंग में बदलाव कर विज्ञापनों से पाएं निजात

क्या आप अपने फेसबुक पेज पर दिखने वाले अनचाहे विज्ञापनों से परेशान हैं। अगर हां तो कुछ आसान उपाय आजमाकर आप कंपनियों को विज्ञापन पोस्ट करने से रोक सकते हैं। दरअसल, विज्ञापनदाता फेसबुक पर यूजर की ओर से साझा की गई तस्वीरों, कमेंट, लाइक पर लगातार नजर रखते हैं। इससे उन्हें यूजर की पसंद-नापसंद और जरूरतों का अंदाजा लगाने में मदद मिलती है। वे यूजर को खरीददारी के लिए उकसाने को उसी के हिसाब से विज्ञापन देते हैं।
एड की सेटिंग देखें : फेसबुक पेज पर ऊपर दायीं ओर एरो पर क्लिक कर ‘Setting‘ के विकल्प में जाएं। इसमें बायीं तरफ दी गयी लिस्ट में ‘Ads’ का विकल्प मिलेगा। इसपर क्लिक कर देखें कि आप अनजाने में किन-किन कंपनियों के साथ अपनी निजी जानकारी साझा कर रहे हैं। इसके बाद दायीं तरफ दिए ‘Edit’ पर जाकर ‘No One’ का विकल्प चुनें और ‘Save Changes’ पर क्लिक कर अपने फेसबुक पेज को विज्ञापन मुक्त बनाएं।
डिजिटल एलायंस पेज पर जाएं : सिर्फ फेसबुक ही नहीं, गूगल समेत अन्य वेबसाइट खंगालते वक़्त भी विज्ञापन यूजर को परेशान करते हैं। इनसे बचने के लिए गूगल के जरिये ‘डिजिटल एडवरटाइजिंग एलायंस ऑप्ट आउट पेज’ पर जाएं। यहां आपको उन सभी कंपनियों की सूचि मिलेगी जो आपकी पसंद-नापसंद और जरूरतों के हिसाब से विज्ञापन पोस्ट करती है। जिन कंपनियों को आप विज्ञापन देने से रोकना चाहते हैं उनके बगल में दिए बॉक्स पर टिक कर नीचे मौजूद ‘Submit Your Choices’ विकल्प पर क्लिक कर दें। इससे इन कंपनियों की एड सेटिंग खुद ब खुद बदल जाएगी।
कूकीज क्लीयर करते रहें : फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल साइट के इस्तेमाल के बाद अकाउंट ‘Sign out’ करना और कूकीज क्लीयर करना न भूलें। हो सके तो सोशल साइट का प्रयोग सामान्य नेट सर्फिंग के लिए इस्तेमाल में आने वाले ब्राउज़र पर न करें। इससे कंपनियां आपकी ऑनलाइन गतिविधियों तक पहुंच हासिल नहीं कर पति है।
‘Opt out mobile’ आजमाएं : स्मार्टफोन पर कंपनियों की ओर से पोस्ट किये जाने वाले विज्ञापनों से बचने के लिए यूजर ‘Opt out mobile’ फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस बाबत सबसे पहले www.google.com/settings/ads/authenticated पर जाएं। यहां ‘Ads based on your interests’ का विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक कर ‘Switch off’ का विकल्प चुनें। आपके स्मार्टफोन पर ऐसे विज्ञापन आना बंद हो जायेंगे जो आपकी पसंद-नापसंद से प्रेरित है।

Thursday, 17 December 2015

चार आसान तरीके फ्री वाईफाई से रखेंगे सुरक्षित

रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और हाईवे में अब फ्री वाईफाई की सुविधा दी जाने लगी है। सरकार की इस सुविधा का फायदा जितना आम युवाओं को हो रहा है उतना ही खतरा भी बढ़ गया है। फ्री इन्टरनेट की आड़ में कई गिरोह यूजर्स का मोबाइल डाटा चुराने का काम क्र रहे हैं।  ऐसे में जरुरी है कि कुछ आसान सी बातों का ध्यान रखा जाए जिससे फ्री वाईफाई का फायदा भी उठाया जा सके और अपने मोबाइल के डाटा को किसी गलत हाथ में पड़ने से रोका जा सके।
  1. शेयरिंग को बंद क्र दें : अगर आप होटल या रेस्तरां में वाईफाई का इस्तेमाल क्र रहे हैं तो अपने कंप्यूटर में वाईफाई शेयरिंग को बंद कर दें। इसके लिए सबसे पहले कंप्यूटर या लैपटॉप के ‘Computer Panel’ को खोलकर Network में जाएं। वहां Network And sharing Center पर क्लिक करें। उसके बाद बाईं ओर दिए गए Advance Sharing Setting पर जाएं। वहां Public Folder Sharing में दिए दो विकल्प में से नीचे वाले विकल्प का चयन करें। इससे पब्लिक नेटवर्क पर कंप्यूटर/लैपटॉप की फाइलों की शेयरिंग बंद हो जाएगी।
  2. http को चेक करें : http यानी हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल। इसके जरिए पता चलता है कि वेबसाइट सुरक्षित है। अगर http के आगे लॉक आइकॉन है तो इसका मतलब है कि वेबसाइट पूरी तरह सुरक्षित है। अगर पब्लिक वाईफाई इस्तेमाल क्र रहे हैं तो यह जरुर चेक करें कि यह सुरक्षित है या नहीं।
  3. फायर-वॉल को सक्रिय करें : मौजूदा समय में ज्यादातर ऑपरेटिंग सिस्टम बेसिक फायरवॉल के साथ ही आते हैं। इसे ऑन करने से प्राइवेसी को बढ़ाया जा सकता है। फायरवॉल सक्रिय करने के लिए  ‘Control Panel’ में जाएं। यहां ‘System Security’ पर क्लिक कर ‘Window Firewall’ को खोलें और ‘On’ बटन पर क्लिक करें। होटल-रेस्तरां में वाईफाई का इस्तेमाल करने से पहले वहां के स्टाफ से उसके वाईफाई यूजर नेम की जानकारी जरुर ले लें।
  4. Forget Network जरुर करें : वेब ब्राउज़िंग करने के बाद अपने डिवाइस से पब्लिक वाईफाई सर्विस को हटा दें। ऐसा करने से फोन दोबारा पब्लिक वाईफाई की रेंज में आने पर खुद कनेक्ट नहीं होगा। कई बार आपका मोबाइल जेब में रहता है लेकिन वाईफाई जोन में आते ही अपने आप कनेक्ट हो जाता है। इसके लिए वाईफाई ऑप्शन के अंदर जाकर उस नेटवर्क पर टैप करने के बाद Forget Network के ऑप्शन पर क्लिक करें।

Sunday, 18 October 2015

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों का अंजाना तथ्य

सोशल नेटवर्किंग साइट्स गूगल, फेसबुक और ट्विटर के बारे में कुछ ऐसे फैक्ट्स हैं जिनके बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते।—–>>>

फेसबुक का रंग नीला इसलिए है क्योंकि मार्क जकरबर्ग हरा और लाल रंग नहीं देख सकते।

गूगल ने google.com के अलावा कई सारी ऐसी डोमेन्स खरीद रखी हैं जो जिनमें गूगल की स्पेलिंग गलत है। ऐसा इसलिए ताकि अगर गलत स्पेलिंग भी टाइप हो जाए तो आप गूगल पेज पर ही पहुंचें। इनमें से कुछ हैं: gooogle.com, gogle.com, और googlr.com।
यूआरएल बार में https://discover.twitter.com/first-tweet टाइप करेंगे तो आपको अपना पहला ट्वीट मिल जाएगा। आप दूसरों के पहले ट्वीट्स भी देख सकते हैं।

गूगल बकरियां किराये पर लेती है!
जी हां, गूगल 200 बकरियां किराये पर लेती है। नहीं, नहीं! इन बकरियों का सर्च इंजन से कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, गूगल के हेडक्वॉर्टर्स में उगी घास खाने के लिए इन्हें कैलिफॉर्निया ग्रेजिंग नाम की एक कम्पनी से किराये पर लाया जाता है। घास कटवाने के लिए गूगल में मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

गूगल को खरीद सकती थी Yahoo!
याहू गूगल को एक मिलियन डॉलर में खरीद सकती थी, लेकिन नहीं खरीदा। इसी की वजह से लैरी पेज और सर्जी ब्रिन ने अपनी पीएचडी बीच में छोड़कर गूगल पर काम करना शुरू किया। सोचिये, ये डील हो जाती तो याहू आज कहां होता…

फेसबुक के पास एक स्पेशल टीम है जो उस डेटा का ऐनालिसिस करती है जो आपने टाइप तो किया पर पोस्ट नहीं किया। यह टीम फेसबुक का ‘सोशल एक्सपेरिमेंट’ कंडक्ट करती है जिसके तहत उन्हें वे कारण ढूंढने होते हैं जिनके चलते यूजर ने अपना मेसेज या स्टेटस टाइप कर के छोड़ दिया। आगे नहीं भेजा। इससे उन्हें ह्यूमन सायकॉलजी की समझ मिलती है।
आइसलैंड ने अपना संविधान दोबारा लिखने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल किया था। जी हां, यह सच है।

गूगल के असली फाउंडर ‘Googol’ बनाने जा रहे थे। लेकिन, इनवेस्टर्स ने चेक पर ‘Google’ लिख दिया। …फिर क्या, ‘Google’ आपके सामने है।

ट्विटर के लोगो डिजायन के पीछे 13 सर्कल हैं। ये 13 गोले हैं ट्विटर के डिजायन का आधार।

Saturday, 5 September 2015

सारे एकाउंट एक साथ और पासवर्ड का झंझट भी खत्म

कुछ एप और वेबसाइट पासवर्ड मैनेजमेंट की सुविधा देती है, जहां पर सारे एकाउंट जोड़ दिए जाए तो पासवर्ड याद करने का झंझट ही खत्म हो जाता है। बस वह एप और वेबसाइट ओपन करनी होगी और सारे ईमेल, सोशल मीडिया के एकाउंट एक्टिव हो जाएंगे। सुरक्षा के लिहाज से भी यहां पर पुख्ता इंतजाम है। एप या वेबसाइट खोलने से पहले वन टाइम पासवर्ड  जरुरत होती है, जो मोबाइल नंबर पर आता है।
लास्टपास में पासवर्ड सेव : लास्टपा में एकाउंट बनाने के बाद अपने सोशल मीडिया एकाउंट  पासवर्ड सेव करने होंगे। उदाहरण के लिए फेसबुक, ट्विटर, गूगल और ईमेल के पासवर्ड इस वेबसाइट पर सेव कर दिए तो इन एकाउंट में लॉग-इन करने के लिए सिर्फ ईमेल एड्रेस सबमिट करना होगा। इसके बाद लास्टपास अपने आप सक्रिय हो जाती है। संदिग्ध कंप्यूटर से लॉग-इन होने पर इसमें मास्टर पासवर्ड से लॉग-इन करने का विकल्प दिया जाता है।
वन टाइम पासवर्ड : आपका मास्टर पासवर्ड किसी और को पता चल गया तो इसमें सुरक्षित सभी सोशल एकाउंट के पासवर्ड चुराए जा सकते हैं। इससे बचने के लिए यह वन टाइम पासवर्ड की सुविधा भी देती है। इंटरनेट कैफे और दूसरे का कंप्यूटर इस्तेमाल करने पर भी इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके जरिए बेहद कठिन पासवर्ड आपके फोन नंबर पर मैसेज किया जाएगा। इस पासवर्ड को सबमिट करने के बाद ही सोशल एकाउंट में लॉग-इन कर सकते हैं। वन टाइम पासवर्ड कुछ देर के लिए काम करता है।
पासवर्ड मैनेजमेंट की सुविधा देने वाले टूल :
फोन में छिपाएं एप्लीकेशन :
किसी और व्यक्ति के हाथ में फोन जाने पर वह वाट्सएप, फेसबुक के निजी मैसेज पढ़ सकता है। ‘स्मार्ट एपलॉक’ से फोन में मौजूद एप को न सिर्फ पासवर्ड के साथ सुरक्षित बना सकते हैं बल्कि कोई इन्हें खोलेगा तो यह मैसेज आएगा कि एप क्रैश हो गई है और यह खुल नहीं पाएगी। सिर्फ आप ही उस एप को खोल पाएंगे। इसके लिए सबसे पहले अपने फोन में प्ले स्टोर से ‘स्मार्ट एपलॉक’ एप्लीकेशन डाउनलोड कर लें। इसके बाद जिन एप को पासवर्ड के साथ प्रोटेक्ट करना चाहते हैं उन्हें इसमें एड करें और इन्हें खोलने का पासवर्ड तय करें।

दोबारा पाएं स्मार्टफोन से डिलीट हो गई दोस्तों की यादें

स्कूल और कॉलेज लाइफ में खूब दोस्त बनते हैं। दोस्तों संग बिताये पलों को अपने फोन में संभालकर हर कोई रखता है। पर कई बार गलती से या किसी की शैतानी से आपका डाटा डिलीट हो जाता है। ऐसे में थोड़ी सी जानकारी से आप अपना डाटा वापस पा सकते हैं। इंटरनेट पर कई ऐसे सॉफ्टवेयर मौजूद है जिनकी मदद से डिलीट हुए डाटा को वापस स्टोर किया जा सकता है। इन सॉफ्टवेयर से कार्ड में सेव गाने, फोटो, वीडियो व दूसरी फाइलों को रीस्टोर किया जा सकता है।
एंड्राइड यूजर को जीमेल से मिल सकता है कांटेक्ट : एंड्राइड फोन इस्तेमाल करने वाले लोग जीमेल के जरिए फोन में सेव कांटेक्ट को वापस हासिल कर सकते हैं। गूगल के एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले फोन में सेव कांटेक्ट जीमेल में सेव हो जाते हैं। गूगल के मुताबिक फोन से डिलीट हुए कांटेक्ट को 30 दिन के अंदर ही जीमेल से प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए फोन में लॉग-इन होने वाले जीमेल अकाउंट का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। कांटेक्ट नंबर रीस्टोर करने के लिए कंप्यूटर पर जीमेल अकाउंट लॉग-इन करें। इसके बाद कंपोज के ऊपर जीमेल लिखा हुआ दिखेगा। यहां क्लिक करने के बाद कांटेक्ट का विकल्प आएगा। इस विकल्प को खोलने परफोन में सेव कांटेक्ट मिल जाएंगे।
हर फाइल मिलेगी वापस: फोन या कैमरा के मेमोरी कार्ड से डिलीट हुआ डाटा कुछ सॉफ्टवेयर की मदद से हासिल किया जा सकता है। कार्ड में अगर तस्वीरें, वीडियो, म्यूजिक, ईमेल, डॉक्यूमेंट और अन्य फाइलें डिलीट हो गयी है तो उन्हें भी आसानी से हासिल किया जा सकता है। मेमोरी कार्ड में डाटा डिलीट होने के बाद एक बात का ख्याल जरूर रहे कि फोटो या वीडियो डिलीट होने पर मेमोरी कार्ड को इस्तेमाल न करें। इसे तुरंत फोन से निकाल लें।
ऐसे पाएं कार्ड से डिलीट हुआ डाटा:
    •  recuva.en.softonic.com पर जाकर इसे डाउनलोड कर लें।
    • कार्ड रीडर से मेमोरी कार्ड लगाएं।
    • recuva को खोलने पर कई फाइल के फॉर्मेट मिलेंगे।
    • आप किसी भी फाइल को रिकवर करना चाहते हैं तो ‘अंदर’ के विकल्प पर क्लिक करें।
    • फाइल लोकेशन का विकल्प आएगा। यहां ब्राउज़ माई कंप्यूटर से मेमोरी कार्ड को सेलेक्ट करें। यहां डिलीट हुआ सभी डाटा मिल जाएगा।

मोबाइल पर ईमेल और मैसेज पढ़िए नहीं सीधे सुनिए

अगर आपके मैसेज या ईमेल को कोई पढ़कर सुनाए और उसके लिए आपको शुल्क भी नहीं देना पड़े तो कैसा हो। एंड्राइड के गूगल प्ले स्टोर पर कई एप मौजूद है जो आपकी इस ख्वाहिश को पूरा कर सकते हैं इन्हें मुफ्त में इनस्टॉल भी किया जा सकता है। इसके अलावा यूजर अपने फोन में मौजूद एमएस ऑफिस और पीडीएफ फाइलों पर प्रिंट टेक्स्ट को आसानी से सुन सकते हैं। इन एप का फायदा सफर के दौरान भी लिया जा सकता है।
कॉपी करते ही बोलने लगेगा टेक्स्ट : गूगल प्ले स्टोर से ‘Easy text to speach’ को डाउनलोड करके मोबाइल में इंस्टॉल कर लें। इसके बाद यूजर अपने मोबाइल में मौजूद जिस फाइल या टेक्स्ट को कॉपी करेंगे वह तुरंत आवाज में बदल जाएंगे। यूजर जिस पैराग्राफ या लाइन को सुनना चाहते हैं उसे दबा कर रखें। पैराग्राफ या लाइन को सेलेक्ट करते ही कॉपी का विकल्प दिखाई देगा जैसे ही कॉपी के विकल्प पर क्लिक करेंगे तो यह अक्षर सुनाई देने लगेंगे। इससे अंग्रेजी उच्चारण भी सही होगा।
आवाज, स्पीड पर नियंत्रण संभव : गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद ‘Text to voice’ एप में बोलने की गति और आवाज को नियंत्रित कर सकते हैं। अक्सर यूजर को तेज अंग्रेजी सुनने की आदत नहीं होती है और वह शब्दों को याद नहीं कर पाता। आवाज और बोलने की स्पीड को अपने हिसाब से सेट किया जा सकता है।
डेस्कटॉप का टेक्स्ट बोलेगा : जो यूजर अधिकतर समय डेस्कटॉप का इस्तेमाल करते हैं और उनके लिएमोबाइल में हर एक अक्षर को कॉपी करके सुनना मुश्किल होता है तो वह अपने डेस्कटॉप में ‘Speak it’ को इंस्टॉल करके किसी भी टेक्स्ट को कॉपी करके सुन सकते हैं। इसके लिए गूगल क्रोम ब्राउज़र का होना जरुरी है। ‘Speak it’ को इंस्टॉल करते ही डेस्कटॉप में ऊपर की तरफ दाईं ओर यूआरएल बॉक्स के बराबर में साउंड का निशान बन जाएगा। इससे यूजर किसी भी टेक्स्ट को सेलेक्ट करके आसानी से सुन सकता है।

स्मार्टफोन से कमा सकते हैं लाखों रु.

अगर आपके पास स्मार्टफोन है और फोटोग्राफी का शौक रखते हैं तो आपघर बैठे लाखों रूपए कमा सकते हैं। कई ऑनलाइन वेबसाइट आपके फोटो खरीदने के लिए तैयार हैं। आप फोटो खींचकर वेबसाइट पर अपलोड कर सकते हैं। कंपनी इन फोटो का इस्तेमाल दुनिया के अलग-अलग देशों में करती हैं। यदि आपका फोटो चुना जाता है, तो आपको एकमुश्त भुगतान के बाद रॉयल्टी भी मिलेगी।
विभिन्न वेबसाइट्स पर फोटो भेजने के लिए जरूरी नहीं कि आपके पास प्रोफेशनल कैमरा हो, आप अपने स्मार्टफोन से भी फोटो खींच सकते हैं। हालांकि, फोटो पिक्सल का ख्याल रखना जरूरी है। पिक्चर क्वालिटी बेहतर होगी, तभी कंपनी आपको डिमांड भेजेगी।
इन वेबसाइट्स पर कर सकते हैं फोटो अपलोड
इस वेबसाइट के 100 देशों में 1.50 मिलियन के अधिक क्लाइंट हैं। शुरुआत में फोटो की कीमत उसकी क्वालिटी के आधार पर तय की जाती है। कंपनी की डिमांड के मुताबिक आपको फोटो उपलब्ध करानी होगी। जिसके बाद आपको उसकी कीमत मिल सकेगी।
इस वेबसाइट का दावा है कि वह 150 से अधिक देशों में डील करती है। अब तक यह अपने कंट्रीब्यूटर को 250 मिलियन डॉलर से अधिक पेड कर चुकी है। कंपनी के पास रॉयल्टी फ्री फोटो अपलोड करने का भी ऑप्शन है।
वेबसाइट पर फोटो, इलस्ट्रेशन और वीडियो अपलोड किए जा सकते हैं। यहां आपको रॉयल्टी फ्री फोटो अपलोड करने का विकल्प मिलेगा। हां, आपके द्वारा लिए गए फोटो के पिक्सल अच्छे होने चाहिए। इसके लिए बेहतर कैमरा उपयोग करेंगे, तो अच्छा रेस्पॉस मिलेगा।

चार सावधानियों से मोबाइल को रखें वायरस से दूर

मल्टीमीडिया फोन जितनी सुविधाएं दे रहे हैं उतनी ही समस्याओं का कारण भी बन रहे हैं। साइबर सुरक्षा पर काम करने वाली एक कंपनी के मुताबिक हर 5 वां एंड्रॉयड यूजर वायरस की चपेट में आता है। वायरस फोन को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं साथ ही इससे जरुरी और निजी जानकारियों के चोरी होने की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में जरुरी है कि आप पहले से सजग रहें।
सावधानी 1 : क्लोन एप से रहें सावधान : गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे भी एप हैं जो किसी प्रचलित एप जैसे ही दिखते हैं लेकिन स्पैम भेजने का काम करते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण नकली ‘बीबीएम’ एप है। इसके साथ ही कई एप ऐसे भी हैं जो डाउनलोड करने पर मैलवेयर नहीं देते लेकिन अपडेट करने पर फोन में वायरस आ जाता है।
सावधानी 2 : वाईफाई और हॉटस्पॉट बंद रखें : घर से बाहर निकलते ही अपने वाईफाई को बंद कर दें। अगर कहीं अनजान सोर्स से वाईफाई नेटवर्क आ भी रहा हो तो उसका इस्तेमाल नहीं करना समझदारी होगी। ओपन वाईफाई में वायरस आने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। इसके अलावा फोन या टैबलेट में वेब ब्राउज़िंग के दौरान अगर कोई वेबसाइट लॉटरी या गिफ्ट का लालच दे तो उस पर क्लिक न करें। इस तरह की ईमेल से भी वायरस का खतरा बना रहता है।
सावधानी 3 : ब्लूटूथ को रखें ऑफ : फोन का ब्लूटूथ तभी ऑन करें जब जरुरत हो और इसके बाद तुरंत ऑफ़ भी कर दें।
सावधानी 4 : एप डाउनलोड करने से पहले देखें : किसी भी एप को डाउनलोड करने से पहले आपको उसकी शर्तों को मंजूर करना होता है। मगर अक्सर उन शर्तों को बिना पढ़े एक्सेप्ट पर क्लिक करना खतरनाक साबित हो सकता है। कई एप में यह शर्त होती है कि एप आपके लोकेशन, कांटेक्ट लिस्ट, सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल, टेक्स्ट और वीडियो मैसेज, कैलेंडर जैसी जानकारियों को एक्सेस कर सकता है।

एप डाउनलोड कर मोबाइल में बढ़ाएं इंटरनेट की रफ्तार

देश के 21 करोड़ 30 लाख लोग मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। ये यूजर्स हर माह इंटरनेट पर औसत 235 रूपये तक खर्च करते हैं। यह आंकड़ा पिछले साल तक 173 रूपये था। यह आंकड़े मोबाइल यूजर्स का डाटा जुटाने वाली संस्था आई क्यूब की रिसर्च में सामने आये हैं। इनसे पता चलता है कि मोबाइल पर इंटरनेट सर्चिंग पर खर्च बड़ी तेजी से बढ़ा है। खर्च को सीमित रखना हर यूजर के लिए चुनौती है, थोड़ी सी सावधानी बरतें तो इंटरनेट डाटा भी बचेगा और इंटरनेट की रफ्तार भी बढ़ जाएगी।
अनेवो एक्सटेंड : स्मार्टफोन में इंटरनेट बिल को कम करने के लिए अनेवो एक्सटेंड (anavo extendapp) एप डाउनलोड करें। यह एंड्राइड और आईओएस ऑपरेटिंग सिस्टम को सपोर्ट करता है। अनेवो एप अपने सर्वर के जरिए मोबाइल में इस्तेमाल हो रहे एप और ब्राउज़र का डाटा ट्रांसफर करता है। यह एप डाटा की खपत को कम करता है और इंटरनेट की रफ्तार को बढ़ाता है। यह मोबाइल स्क्रीन पर बताता रहता है कि कितना डाटा सेव किया गया है।
ओपेरा टर्बो : लैपटॉप या कंप्यूटर में इंटरनेट खर्च को कम करने के लिए ओपेरा टर्बो (opera turbo app) का इस्तेमाल करें। ओपेरा विंडोज और मैक ऑपरेटिंग सिस्टम को सपोर्ट करता है। यह ब्राउज़िंग डाटा को कंप्रेस कर देता है। हालांकि, इससे पिक्चर, वीडियो क्वालिटी थोड़ी डल हो जाती है लेकिन सिस्टम में इंटरनेट की स्पीड तेज हो जाती है। इसके लिए क्रोम सेटिंग में जा कर इसे एक्टिव करना होता है।
मोबाइल सेटिंग में लिमिट फिक्स करें : अगर आपके पास 4 जीबी डाटा का प्लान है और उससे ज्यादा इस्तेमाल कर लेते हैं तो एक्स्ट्रा डाटा का चार्ज देना पड़ता है। मोबाइल के सेटिंग में जाकर डाटा यूज की लिमिट फिक्स कर लें। मोबाइल के सेटिंग ऑप्शन में जाएं और उसमें दर्शाए जा रहे वार्निंग लेवल को डाटा यूज के हिसाब से सेट कर दें। इसके साथ ही बैकग्राउंड डाटा को भी ऑफ कर दें। लिमिट से ज्यादा यूज होते ही खुद ब खुद इंटरनेट बंद हो जाएगा।
इन बातों का भी रखें ध्यान :
  • अगर हेवी डाटा खपत होने की संभावना है तो वाईफाई से काम करें।
  • फोन पर नोटिफिकेशन आते रहते हैं। इसकी जरुरत नहीं है तो नोटिफिकेशन बंद कर दें।
  • गेम खेलने के दौरान कई विज्ञापन और वीडियो एप आते हैं। गेम खेलने से पहले  इंटरनेट डाटा को बंद कर दें।
  • मोबाइल पर कोई वेबसाइट खोलते समय उसके डेस्कटॉप वर्जन से बचें।

Friday, 28 August 2015

मोबाइल पर ईमेल और मैसेज पढ़िए नहीं सीधे सुनिए

अगर आपके मैसेज या ईमेल को कोई पढ़कर सुनाए और उसके लिए आपको शुल्क भी नहीं देना पड़े तो कैसा हो। एंड्राइड के गूगल प्ले स्टोर पर कई एप मौजूद है जो आपकी इस ख्वाहिश को पूरा कर सकते हैं इन्हें मुफ्त में इनस्टॉल भी किया जा सकता है। इसके अलावा यूजर अपने फोन में मौजूद एमएस ऑफिस और पीडीएफ फाइलों पर प्रिंट टेक्स्ट को आसानी से सुन सकते हैं। इन एप का फायदा सफर के दौरान भी लिया जा सकता है।
कॉपी करते ही बोलने लगेगा टेक्स्ट : गूगल प्ले स्टोर से ‘Easy text to speach’ को डाउनलोड करके मोबाइल में इंस्टॉल कर लें। इसके बाद यूजर अपने मोबाइल में मौजूद जिस फाइल या टेक्स्ट को कॉपी करेंगे वह तुरंत आवाज में बदल जाएंगे। यूजर जिस पैराग्राफ या लाइन को सुनना चाहते हैं उसे दबा कर रखें। पैराग्राफ या लाइन को सेलेक्ट करते ही कॉपी का विकल्प दिखाई देगा जैसे ही कॉपी के विकल्प पर क्लिक करेंगे तो यह अक्षर सुनाई देने लगेंगे। इससे अंग्रेजी उच्चारण भी सही होगा।
आवाज, स्पीड पर नियंत्रण संभव : गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद ‘Text to voice’ एप में बोलने की गति और आवाज को नियंत्रित कर सकते हैं। अक्सर यूजर को तेज अंग्रेजी सुनने की आदत नहीं होती है और वह शब्दों को याद नहीं कर पाता। आवाज और बोलने की स्पीड को अपने हिसाब से सेट किया जा सकता है।
डेस्कटॉप का टेक्स्ट बोलेगा : जो यूजर अधिकतर समय डेस्कटॉप का इस्तेमाल करते हैं और उनके लिए मोबाइल में हर एक अक्षर को कॉपी करके सुनना मुश्किल होता है तो वह अपने डेस्कटॉप में ‘Speak it’ को इंस्टॉल करके किसी भी टेक्स्ट को कॉपी करके सुन सकते हैं। इसके लिए गूगल क्रोम ब्राउज़र का होना जरुरी है। ‘Speak it’ को इंस्टॉल करते ही डेस्कटॉप में ऊपर की तरफ दाईं ओर यूआरएल बॉक्स के बराबर में साउंड का निशान बन जाएगा। इससे यूजर किसी भी टेक्स्ट को सेलेक्ट करके आसानी से सुन सकता है।

Friday, 8 August 2014

घर से ऑफिस-ऑफिस

बात चौंकाने वाली है मगर सही है कि गूगल पर जिस 'की वर्ड' को सबसे ज्यादा सर्च किया गया है वह है Work From Home । हर कोई घर बैठे कमाई करना चाहता है, चाहे पार्ट टाइम काम हो या फूल टाइम। इनमें एक बड़ा हिस्सा उन महिलाओं का है जो घर की जिम्मेदारी उठाने के साथ काम भी करना चाहती है। यह उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इंटरनेट पर Work from home के तमाम ऐसे ऑप्शन है, जो महिला और पुरुष दोनों के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं। 

Friday, 25 April 2014

ऑनलाइन व्यवसाय के 5 मिथकों से बचें

भारत में उत्पादों और सेवाओं की खरीद केलिए इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोगों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आपकी कंपनी के लिए ऑनलाइन मौजूदगी अब बेहतर व्यावसायिक समझ है। व्यावसायिक वेबसाइट में उपभोक्ताओं को आपके व्यवसाय के बारे में अधिक जानकारी मिलती है और वे अधिक खरीद के लिए आपसे संपर्क बना सकते हैं। अगर आपके व्यवसाय की ऑनलाइन उपस्थिति नहीं है और इसका कारण तकनीक से परिचित न होना अथवा इस प्रक्रिया का अधिक खर्चीला होना या फिर आप ऐसा सोच रहें हैं कि आपका व्यवसाय काफी छोटा है या वेब पर होने के बावजूद लाभ नहीं हो पा रहा, तो कुछ मिथकों से आपको बचना होगा।

Thursday, 24 April 2014

फिर से पाएं खोई फाइल को

वह पल कितना टेंशन भरा होता है, जब कोई कंप्यूटर फाइल जिसमें आपका महत्वपूर्ण डाटा स्टोर है वह गलती से आपसे डिलीट हो जाता है। आप समझ बैठते हैं कि आपकी सारी मेहनत बेकार चली गई और वह फाइल दोबारा नहीं मिल सकती है। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि यदि कभी गलती से ऐसा हो जाए तो बहुत हद तक संभव है कि आप पुनः उस डिलीट फाइल को रिकवर कर सकते हैं। जी हां, आज आपको डिलीट फाइल से संबंधित कुछ ऐसी ही बात बताते हैं, जो आपके टेंशन को बहुत हद तक कम कर देगा। साथ ही आप अपने खोए हुए बहुमूल्य डाटा को फिर से वापस पा लेंगे। आमतौर पर जब हम कंप्यूटर में किसी फाइल को डिलीट करते हैं तो वह फाइल पहले रिसाइकिलबिन में जाती है। यदि आप फाइल को रिसाइकिलबिन से डिलीट करते हैं तो वह फाइल हमेशा के लिए डिलीट हो जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि जब आप ऐसा करते हैं तो आप एक तरह से हार्ड ड्राइव को यह संकेत देते हैं कि अब आपको उस फाइल की कोई जरुरत नहीं रह गई है और सिस्टम उस फाइल को हटा देता है और आप समझ बैठते हैं कि वह फाइल डिलीट हो चुकी है।

Wednesday, 16 April 2014

इंटरनेट आमदनी के 5 तरीके और भी...

नेट के जरिए धन अर्जित करने के वैध तरीकों पर पहले भी हमने चर्चा की थी। आइए इंटरनेट से आय के पाँच और तरीकों पर इस बार नजर डालते हैं। 
ब्लॉगिंग  
ब्लॉगिंग की शुरुआत तो अपने विचारों और रचनाओं को प्रकट करने के मंच के रूप में हुई थी, पर धीरे-धीरे उसका विस्तार हो चुका है। वर्डप्रेसब्लॉगर आदि के जरिए ब्लॉग बनाना बहुत आसान है। लेकिन क्या ब्लॉगों के लिए भी उसी तरह विज्ञापन जुटाए जा सकते है, जैसे की वेबसाइटों या पत्र-पत्रिकाओं के लिए जुटाए जाते हैं? यह थोड़ा मुश्किल तो है पर असंभव नहीं। बशर्ते आपका ब्लॉग किसी न किसी रूप में विशिष्ट हो और उसे पढ़ने वालों की संख्या अधिक हो। ऐसा अच्छी सामग्री के जरिए भी हो सकता है और और अच्छे पब्लिसिटी के जरिए भी।

Monday, 14 April 2014

कामयाब वेबसाइट

क्या आपने अपने व्यक्तिगत या व्यवसायिक उपयोग के लिए कोई साइट बनाई है? यदि हां तो इससे अपनी जरुरत के मुताबिक नतीजे हासिल करने के लिए इन चंद बातों पर जरुर गौर फरमाएं। 
सबसे पहली जरुरत इस बात की है कि आपकी साइट प्रयोग में आसान हो ताकि उस पर ज्यादा से ज्यादा लोग आसानी से पहुंच सके। याद रखें यदि कोई आगंतुक आपकी साइट पर सफलता से नेविगेट नहीं कर सकता तो यह आपके लिए निगेटिव साबित होगा। आपकी वेबसाइट का होमपेज इतना आकर्षक होना चाहिए कि उसपर आने के बाद प्रयोक्ता सभी फीचर्स में न चाहते हुए भी रूचि ले और आपके लक्ष्य के मुताबिक अनुसरण करे। मसलन यदि आपके उत्पाद या सेवा का प्रचार उसमें है तो उसे इतना प्रभावशाली होना चाहिए कि आपको कस्टमर मिल जाए।

Friday, 21 March 2014

वेबसाइट बनाएं तो....


आप अपनी वेबसाइट बनाने जा रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं कुछ टिप्स जिनसे इसे बनाना काफी हद तक सार्थक हो सकेगा। 
अपनी साइट बनाने के लिए किसी वेब डेवलपर की नियुक्ति से पहले आपको अपना होमवर्क करना चाहिए जैसे- आपकी साइट का उद्देश्य क्या है? क्या यह आपके उत्पादों का एक ऑनलाइन ब्रोशर होगा या आपकी योजना अपने उत्पाद या सेवा को वास्तव में इंटरनेट पर बेचने की है। इसके लिए आपका बजट क्या है? साइट की तमाम देखभाल को आप कैसे मैनेज करेंगे यह भी पहले तय करें। यह भी पहले से जान लें कि क्या वेब डेवलपर आपके वेबसाइट के डिज़ाइन एवं मार्केटिंग दोनों के लिए जिम्मेदार होगा?