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Thursday, 25 February 2016

KFC की कहानी

हम में से बहुतों ने KFC का नाम सुना होगा। आपको KFC चिकन पसंद हो न हो लेकिन इसकी कहानी जरुर पसंद आयेगी। KFC (Kentucky Fried Chicken) के संस्थापक का नाम कर्नल हारलैंड सांडर्स है। कर्नल सांडर्स का छोटा सा बिजनस था जिससे इनकी रोजी-रोटी चलती थी, लेकिन वहां पर सड़क बनने के कारण इनका बिजनस बंद हो गया। इसके बाद उनके पास कुछ नहीं बचा था और उनकी उम्र भी करीब 65 साल हो चुकी थी। उनको चिकन बनाना अच्छा लगता था और वह चिकन पर अलग-अलग प्रयोग करते रहते थे। वो मसाले और प्रेसर कुकर लेकर अपनी चिकन बनाने का प्रयोग की मार्केटिंग करने निकल पड़े। उन्होंने अलग-अलग रेस्टोरेंट से मिलना शुरू किया लेकिन सभी रेस्टोरेंट मालिकों ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया।  लेकिन कर्नल सांडर्स ने भी हार नहीं मानी और वह लगातार अपने कार्य में लगे रहे और कोशिश करते रहे।

आपको हैरानी होगी कि वह 1009 बार असफल रहे और 1009 लोगों ने उनको रिजेक्ट कर दिया, तब जाकर उनको सफलता मिल ही गई। 65 की उम्र में ज्यादातर लोग काम करने के बारे में सोचना छोड़ देते हैं।  इस उम्र में कर्नल सांडर्स ने एक ऐसा बिजनस खड़ा कर दिया जो आज 20 देशों में है और इस कंपनी का सालाना टर्न ओवर 20 अरब डॉलर का है।
इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं, कोई भी कार्य अगर ईमानदारी और मेहनत से किया जाए तो एक न एक दिन सफलता जरुर मिलती है। हम भी अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा कर सकते हैं, जरुरत है तो सिर्फ कोशिश करने की और हम सब को पता है कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

Wednesday, 7 January 2015

नौकरी डॉट कॉम की कहानी

संजीव बिखचंदानी ने अपने स्कूल के दिनों से ही इस बात को लेकर मन बना लिया था कि वह नौकरी नहीं करना चाहते। मगर विडंबना देखिए कि वही बिखचंदानी अब लाखों भारतीयों को नौकरी ढूंढने में मदद कर रहे हैं। 
उनका, देश के सबसे प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला हुआ मगर उसे ठुकरा कर उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में पढ़ना तय किया क्योंकि वह कम अवधि का कोर्स था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी कर ली। दो साल बाद जब उन्हें वहां सारी चीजें समझ में आ गयी तो उन्होंने नौकरी छोड़ दी।  1997 में जब संजीव बिखचंदानी ने नौकरी खोजने के लिए एक वेबसाइट बनाई तो उसे लोगों के बीच ऐसी लोकप्रियता मिली कि आज वह भारत के प्रमुख वेब बिज़नेस के मालिक हैं। ऐसी वेबसाइट के बारे में वह इसलिए सोच पाए क्योंकि उन्होंने अपने साथियों को बिज़नेस पत्रिकाएँ आगे के बजाए पीछे से पढ़ते देखा था जहाँ नौकरियों के बारे में जानकारी छपी होती थी। उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में naukrigulf.com99acres.com और  jeevansathi.com आदि को शामिल कर लिया है। 

Thursday, 30 October 2014

'अलीबाबा' की कामयाबी का राज

Alibaba.com के संस्थापक 'जैक मा '
'झींगे इकट्ठे कर लो और और व्हेल खुद ही चली आएंगी' चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के संस्थापक जैक मा शुरुआती वर्षों में इस कथन का अक्सर इस्तेमाल किया करते थे। अपार्टमेंट के एक छोटे से कमरे से आज उसने अपनी ई-कॉमर्स कंपनी को दुनिया भर में मशहूर कर दिया है। चीन की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी Alibaba.com दुनिया भर में नाम कमा रही है। वह किसी बने बनाये नियमों पर काम नहीं करते, बस यह तय करते है कि जो भी करें मुनाफा हो।
1980 में  स्कूल टीचर की नौकरी करने के तीन साल बाद उन्होंने अनुवाद करने वाली एक कंपनी खोली। 1994 में अमेरिका यात्रा के दौरान इंटरनेट पर लोगों को पहली बार एक दूसरे को बात करते हुए देखा। उन्हें यह बात करामाती लगी कि कैसे घर बैठे लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से इंटरनेट के जरिये जुड़ सकते हैं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने 'चाइना पेज' लॉन्च किया। यह देश की पहली ऑनलाइन डायरेक्टरी थी। इसकी कामयाबी से जैक मा चीन में 'मिस्टर इंटरनेट' के नाम से मशहूर हो गए। लेकिन चीन में इंटरनेट का प्रसार ज्यादा न होने की वजह से मा ने चाइना पेज बंद कर दिया और अपने नए प्रोजेक्ट अलीबाबा की तैयारी में लग गए। जापान की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी सॉफ्टबैंक से मा कर्ज लेने में कामयाब हुए। यह कंपनी चीन के आईटी सेक्टर में निवेश करती है। अलीबाबा में शुरुआती निवेश करने वालों में से एक वू यिंग ने वेबसाइट पर लिखा "एक पुरानी सी जैकेट और हाथ में एक कागज पकडे वह हमारे पास आया था।" कुल छह मिनट में उसने निवेशकों को इतना यकीन दिला दिया कि उन्हें दो करोड़ अमेरिकी डॉलर का कर्ज मिल गया। हालांकि नकली सामान बेचने के आरोपों के कारण 2011 में अलीबाबा विवादों में रही। इसके बाद उन्होंने अपने दो सहायकों को नौकरी से निकाल दिया। 2013 में मा ने अलीबाबा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद छोड़ दिया। लेकिन इससे न ही उनकी शोहरत में कोई कमी आई न कंपनी के विवादों में। मा ने इशारा दिया कि आगे वह ऑनलाइन डाटा टेक्नोलॉजी की दिशा में काम करना चाहते हैं। 

Tuesday, 19 August 2014

50 रुपये से शुरू हुआ बिजनस आज 40 करोड़ का

अभिषेक रूंगटा कोलकाता की बिज़नस फैमिली से आते हैं। शुरुआत में उन्होंने खुद का ई-मेल सर्विस सेंटर खोलने का फैसला लिया। उन्हें इसमें परिवार का पूरा सपोर्ट मिला। यह 1997 की बात है। उस वक्त इंटरनेट नया कांसेप्ट था। ई-मेल सर्विस सेंटर का काम बिज़नस और उसके कस्टमर के बीच कम्युनिकेशन था।

Saturday, 26 July 2014

फ्लिपकार्ट की सफलता की कहानी

flipkart यह एक भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी है, जिसकी स्थापना 2007 में सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने की थी। वास्तव में यह ऑनलाइन मेगा स्टोर है, जहां हजारों वस्तुओं की बिक्री होती है। इसका वार्षिक व्यवसाय 500 करोड़ रुपए से भी अधिक है और इसके पास 4500 से भी अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। एक अनुमान के अनुसार इस कंपनी की कीमत 9000 करोड़ रुपए से भी अधिक आंकी गयी है। यह कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु शहर में स्थित है।

Saturday, 11 January 2014

कभी चाय बेचने वाले गुड्डू भाई आज हैं कमोडिटी ट्रेड किंग

बीकानेर में गड्ढों से भरी गली में एक मामूली मकान है। इसके सामान्य से कमरे में एक ऐसा शख्स बैठा है जिसे ढूंढना आसान नहीं है। इस मामूली घर में रहने वाला यह शख्स बहुत अमीर, बहुत चालाक और कमोडिटी मार्केट का बड़ा खिलाड़ी भी है। उन्हें ग्वार ट्रेड का किंग भी कहा जाता है। कमोडिटी एक्सचेंज के ट्रेडर्स का कहना है की उनकी बात को मार्केट प्लेयर्स बड़ी गंभीरता से लेते हैं। वह भले ही सबसे बड़ा ग्वार ट्रेडर न हो, लेकिन सबसे प्रभावशाली जरुर है।

Thursday, 29 August 2013

नुसरत की गिनती सफल महिला व्यवसायियो में होती है।

नुसरत जहाँआरा 
मुसलमान बहुल कश्मीर घाटी में अलगाववादी हिंसा और पुरुष प्रधान कट्टर समाज के साथ लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 35 वर्षीय नुसरत जहाँआरा का नाम कश्मीर के सफल महिला व्यावसायियो में शुमार हो गया है। फूलों के बिजनस से शुरुआत करने वाली नुसरत अब लगभग 50 छोटी-बड़ी कंपनियों की व्यवस्था देख रही है। लेकिन अलगाववादी माहौल और धमकियों के बीच अपने काम की शुरुआत करना इतना आसान नहीं था।

Friday, 22 February 2013

नाई से अरबपति तक

Ramesh Babu with White Rolls Royce  car 
आज मैं आपके साथ एक ऐसे शख्स की कहानी शेयर करूँगा जिसने नाई से अरबपति बनने तक का सफ़र तय किया है। मै बात कर रहा हूँ बेंगलुरु के रहने वाले रमेश बाबु की जिन्होंने अपनी ईमानदारी, कठोर परिश्रम, विनम्रता और दूरदर्शिता के बल पर करोड़ों रूपये का बिजनेस खड़ा कर लिया।

Saturday, 16 February 2013

बालवधू से करोड़पति व्यापारी

कल्पना सरोज 
भारत की एक दलित महिला जिसने पक्षपात, गरीबी और शोषण से बचने के लिए आत्महत्या करने की कोशिश की थी, आज करोड़ों की कंपनी की मालकिन है।
यह कहानी है कल्पना सरोज की जिसका जन्म गरीब दलित परिवार में हुआ, स्कूल में सताया गया, 12 साल की उम्र शादी हो गयी। कल्पना बताती है "जब पहली बार मुंबई आई तो मुझे नहीं मालूम था की मै कहाँ जाऊ। मै एक छोटे से गाँव से थी, आज इस शहर की दो सड़कों के नाम मेरी कंपनी के नाम पर रखे गए है।" भारत में छोटी जाती में पैदा होने वालो को पक्षपात का सामना करना पड़ा है।