सोशल नेटवर्किंग साइट्स गूगल, फेसबुक और ट्विटर के बारे में कुछ ऐसे फैक्ट्स हैं जिनके बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते।—–>>>
फेसबुक का रंग नीला इसलिए है क्योंकि मार्क जकरबर्ग हरा और लाल रंग नहीं देख सकते।
गूगल ने google.com के अलावा कई सारी ऐसी डोमेन्स खरीद रखी हैं जो जिनमें गूगल की स्पेलिंग गलत है। ऐसा इसलिए ताकि अगर गलत स्पेलिंग भी टाइप हो जाए तो आप गूगल पेज पर ही पहुंचें। इनमें से कुछ हैं: gooogle.com, gogle.com, और googlr.com।
यूआरएल बार में https://discover.twitter.com/first-tweet टाइप करेंगे तो आपको अपना पहला ट्वीट मिल जाएगा। आप दूसरों के पहले ट्वीट्स भी देख सकते हैं।
गूगल बकरियां किराये पर लेती है!
जी हां, गूगल 200 बकरियां किराये पर लेती है। नहीं, नहीं! इन बकरियों का सर्च इंजन से कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, गूगल के हेडक्वॉर्टर्स में उगी घास खाने के लिए इन्हें कैलिफॉर्निया ग्रेजिंग नाम की एक कम्पनी से किराये पर लाया जाता है। घास कटवाने के लिए गूगल में मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
गूगल को खरीद सकती थी Yahoo!
याहू गूगल को एक मिलियन डॉलर में खरीद सकती थी, लेकिन नहीं खरीदा। इसी की वजह से लैरी पेज और सर्जी ब्रिन ने अपनी पीएचडी बीच में छोड़कर गूगल पर काम करना शुरू किया। सोचिये, ये डील हो जाती तो याहू आज कहां होता…
फेसबुक के पास एक स्पेशल टीम है जो उस डेटा का ऐनालिसिस करती है जो आपने टाइप तो किया पर पोस्ट नहीं किया। यह टीम फेसबुक का ‘सोशल एक्सपेरिमेंट’ कंडक्ट करती है जिसके तहत उन्हें वे कारण ढूंढने होते हैं जिनके चलते यूजर ने अपना मेसेज या स्टेटस टाइप कर के छोड़ दिया। आगे नहीं भेजा। इससे उन्हें ह्यूमन सायकॉलजी की समझ मिलती है।
आइसलैंड ने अपना संविधान दोबारा लिखने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल किया था। जी हां, यह सच है।
गूगल के असली फाउंडर ‘Googol’ बनाने जा रहे थे। लेकिन, इनवेस्टर्स ने चेक पर ‘Google’ लिख दिया। …फिर क्या, ‘Google’ आपके सामने है।
ट्विटर के लोगो डिजायन के पीछे 13 सर्कल हैं। ये 13 गोले हैं ट्विटर के डिजायन का आधार।
0 टिप्पणियाँ:
Post a Comment