मंदी शब्द सुनने में बहुत बुरा लगता है। देश की खराब अर्थव्यवस्था का असर औरों पर भी पड़ता है क्योंकि सीधे और अप्रत्यक्ष तौर पर सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। तो ऐसे में ये देखना समझदारी होगी कि आपका पैसा कहां खर्च हो रहा है। आप सोच रहे होंगे कि बंधी-बंधाई आमदनी में से अपने खर्चे पुरे कर लें यही बहुत है, ऐसे में बचत कैसे होगी। अपनी आर्थिक स्थति को सुधारने का संकल्प साल के किसी भी समय लिया जा सकता है। लेकिन आप चाहे जिस समय ऐसा करें, बुनियादी बातें एक समान ही रहती हैं। आर्थिक योजना के लिए इन बातों पर गौर करें।
