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Thursday, 29 August 2013

नुसरत की गिनती सफल महिला व्यवसायियो में होती है।

नुसरत जहाँआरा 
मुसलमान बहुल कश्मीर घाटी में अलगाववादी हिंसा और पुरुष प्रधान कट्टर समाज के साथ लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 35 वर्षीय नुसरत जहाँआरा का नाम कश्मीर के सफल महिला व्यावसायियो में शुमार हो गया है। फूलों के बिजनस से शुरुआत करने वाली नुसरत अब लगभग 50 छोटी-बड़ी कंपनियों की व्यवस्था देख रही है। लेकिन अलगाववादी माहौल और धमकियों के बीच अपने काम की शुरुआत करना इतना आसान नहीं था।
नुसरत अपना खुद का काम करना चाहती थी लेकिन उनका परिवार इसके लिए राज़ी नहीं था। तब के श्रीनगर के हिंसक हालात एक लड़की के व्यवसायिक क्षेत्र में कदम रखने के बिलकुल अनुकूल नहीं थे। अलगाववादी हिंसा के अलावा जम्मू-कश्मीर का रूढ़िवादी समाज भी लड़कियों पर कई तरह के अंकुश लगाया करता था।
नुसरत कहती है "मैंने माता-पिता को कुछ हद तक समझाने के बाद फूलों का बिज़नस शुरू कर दिया। जिसमे अलग-अलग समारोहों में फूलों की सजावट की जाती थी और कश्मीर में ये एक नया काम था।" अपने पहले ऑर्डर को याद करते हुए नुसरत बताती है "मेरा पहला काम था तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के मंच को सजाना। मेरे लिए ये पल ख़ुशी और गर्व दोनों का था।" इसके बाद नुसरत को कई बड़े अधिकारियों के श्रीनगर दौरे पर सजावट का काम मिला। उन्होंने बताया की इन महत्वपूर्ण समारोहों की सजावट के लिए उन्हें सरकार द्वारा उस जगह का एंट्री पास दिया जाता था।
माता-पिता के दबाव के कारण नुसरत ने साल 2005 में शादी कर ली। शादी के बाद  नुसरत न सिर्फ काम करती रही बल्कि अपने व्यवसाय को बढ़ा भी लिया। साल 1999 में जब नुसरत ने काम शुरू किया तब उसकी वार्षिक बिक्री 50 लाख रूपये थी जो  अब बढ़ कर 8 करोड़ तक हो हो गई है। नुसरत को कई बार आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। हर कठिनाई का सामना करते हुए नुसरत आज न सिर्फ एक सफल व्यवसायी है बल्कि उन्होंने लगभग 300 लोगों को रोजगार भी दिया है।
अपने इस सफ़र पर नुसरत कहती है "रुकावटें डालने वालों ने मेरे आगे धर्म, समाज और हिंसक माहौल के नाम पर मुझे रोकने की कोशिश की लेकिन मैंने खुद पर भरोसा रखा और आगे बढ़ती गयी। मैंने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया और हर कठिनाई को पार करती गई। मुझे गलत कहने वाले आज मेरी तारीफ करते है ये भी मेरे लिए एक जीत के समान है।"

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