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Thursday, 30 October 2014

'अलीबाबा' की कामयाबी का राज

Alibaba.com के संस्थापक 'जैक मा '
'झींगे इकट्ठे कर लो और और व्हेल खुद ही चली आएंगी' चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के संस्थापक जैक मा शुरुआती वर्षों में इस कथन का अक्सर इस्तेमाल किया करते थे। अपार्टमेंट के एक छोटे से कमरे से आज उसने अपनी ई-कॉमर्स कंपनी को दुनिया भर में मशहूर कर दिया है। चीन की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी Alibaba.com दुनिया भर में नाम कमा रही है। वह किसी बने बनाये नियमों पर काम नहीं करते, बस यह तय करते है कि जो भी करें मुनाफा हो।
1980 में  स्कूल टीचर की नौकरी करने के तीन साल बाद उन्होंने अनुवाद करने वाली एक कंपनी खोली। 1994 में अमेरिका यात्रा के दौरान इंटरनेट पर लोगों को पहली बार एक दूसरे को बात करते हुए देखा। उन्हें यह बात करामाती लगी कि कैसे घर बैठे लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से इंटरनेट के जरिये जुड़ सकते हैं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने 'चाइना पेज' लॉन्च किया। यह देश की पहली ऑनलाइन डायरेक्टरी थी। इसकी कामयाबी से जैक मा चीन में 'मिस्टर इंटरनेट' के नाम से मशहूर हो गए। लेकिन चीन में इंटरनेट का प्रसार ज्यादा न होने की वजह से मा ने चाइना पेज बंद कर दिया और अपने नए प्रोजेक्ट अलीबाबा की तैयारी में लग गए। जापान की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी सॉफ्टबैंक से मा कर्ज लेने में कामयाब हुए। यह कंपनी चीन के आईटी सेक्टर में निवेश करती है। अलीबाबा में शुरुआती निवेश करने वालों में से एक वू यिंग ने वेबसाइट पर लिखा "एक पुरानी सी जैकेट और हाथ में एक कागज पकडे वह हमारे पास आया था।" कुल छह मिनट में उसने निवेशकों को इतना यकीन दिला दिया कि उन्हें दो करोड़ अमेरिकी डॉलर का कर्ज मिल गया। हालांकि नकली सामान बेचने के आरोपों के कारण 2011 में अलीबाबा विवादों में रही। इसके बाद उन्होंने अपने दो सहायकों को नौकरी से निकाल दिया। 2013 में मा ने अलीबाबा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद छोड़ दिया। लेकिन इससे न ही उनकी शोहरत में कोई कमी आई न कंपनी के विवादों में। मा ने इशारा दिया कि आगे वह ऑनलाइन डाटा टेक्नोलॉजी की दिशा में काम करना चाहते हैं। 

1 टिप्पणियाँ:

सुन्दर प्रस्तुति
www.gyankablog.blogspot.com

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