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Tuesday, 1 July 2014

नए उद्यमियों के लिए जरुरी बातें

नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए अगर कुछ पुराने नियम-कायदों पर चलना पड़ता है तो कई बार उन नियम-कायदों को ताक पर भी रखना पड़ता है। कहने का मतलब यह है कि सफलता प्राप्ति का कोई निश्चित पैमाना नहीं होता। तभी तो बुरे से बुरे समय में शुरू किया गया व्यवसाय चल निकलता है और सब कुछ नापतौल कर शुरू किया गया व्यवसाय कभी-कभी औंधे मुंह आ गिरता है। फिर भी कुछ ऐसे जरुरी बातें हैं जिन्हें उधमियों को जान लेना चाहिए।
व्यवसाय शुरू करने या न करने का कभी कोई शुभ समय नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि सफल होने के लिए आपकी अंतर्दृष्टि और प्रतिबद्धता कितनी मजबूत है। इसलिए यदि आपके पास कोई उम्दा विचार है तो उसे कुछ हिस्सों में बाँट दें और देखें कि पहले किस काम को अंजाम देना ठीक रहेगा और बाद में किसे। व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया में ऐसे व्यक्तियों से प्रेरणा लेनी चाहिए, जो लीक से हट कर सोचते हों। 
किसी भी कार्य को शुरू करने से जुड़ी पहली शर्त यह होती है कि अपने निजी जीवन और व्यवसाय को अलग रखा जाए। याद रखें कि कार्य की सफलता बहुत हद तक आपकी मुस्तैदी पर निर्भर करती है, इसलिए व्यायाम भी जरूर करें। एक स्वस्थ शरीर और मस्तिक अधिक रचनात्मक तरीके से सोचता है। व्यवसाय में किसी किस्म की कानूनी रूकावट आने से बचने के लिए शुरू से ही कानूनी मदद आपके साथ होनी चाहिए। 
नए उधमियों के लिए जरुरी है कि एक साथ बहुत सारे काम अपने हाथ में न लें। एक समय में एक ही कार्य को ठीक से करने का प्रयास करें। अपने ग्राहकों के साथ भी वैचारिक आदान-प्रदान जारी रखें। सोशल मीडिया इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ग्राहकों से उनकी जरूरतों और आकांक्षाओं के बारे में पूछें। यदि किसी कार्य में कोई कमी रह जाए तो उसे नकारने की आदत आपकी कार्यप्रणाली में न हो। अपने अहं को दरकिनार कर अन्य अनुभवी व्यक्तियों से बात करें।
अन्य सकारात्मक अनुभव प्राप्त करने के लिए स्टार्ट-अप क्लबों व एंटरप्रेन्योर मीट्स का हिस्सा बनें। फिर सफलता हासिल करने के बाद आप इनके माध्यम से अन्य नवोदित उधमियों को उनके व्यवसाय में मदद कर सकेंगे।

कुछ जरुरी तथ्य 

  • केवल एक बड़ा विचार नहीं, बल्कि आपके पास एक विधिवत योजना, स्पष्ट लक्ष्य व मार्गदर्शन हो। 
  • ग्राहकों से फीडबैक लें और उस पर यकीन करें। 
  • अपने व्यवसाय को हॉबी की तरह न लें। 
  • एक नवोदित की तरह सिखने की इच्छा से ही नए व्यवसाय में उतरें। 
  • अपना एक अंतरिम समूह बनाएं और उसमें समय के साथ-साथ परिवर्तन भी करें। 
  • बड़े दावे करने से बचें। 
  • स्पष्ट हो की आपको कब, कितना, किससे और किसके एवज में फंड चाहिए। 
  • ऐसे निवेशक चुनें, जो पैसे के अलावा नेटवर्क और हुनर भी उपलब्ध करा सकें। 
  • व्यवस्था की दृष्टि से एक डायरी में विस्तारपूर्वक कार्य से जुड़े सभी क्षेत्रों की जरूरतों के बारे में लिखतें रहें। 
  • अवसरों की तलाश में रहें, परंतु ध्यान रखें कि कई बार विकास के अवसर निवेश के हिसाब से बहुत महंगे भी पड़ जाते हैं। 
  • सहकर्मियों को यह भी दिखना चाहिए कि आप असफलता को कितने सकारात्मक रूप में लेते हैं। 


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