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Monday, 14 April 2014

मशरूम उत्पादन कर आत्मनिर्भर बनें

मशरूम एक पौष्टिक आहार है और इसकी स्वादिष्ट सब्जी बनती है। मसरूम  में वसा की मात्रा बिल्कुल कम होती है। इसमें विभिन्न प्रकार के तत्व पाये जाते हैं जैसे, प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज आदि।मशरूम का प्रयोग बहुत से बीमारियों से निजात दिलाता है। ह्रदय रोग तथा मधुमेह जैसी बीमारियों के लिए भी यह अच्छा है। मशरूम की खेती करना बहुत आसान है। इसे पुरुषों के अलावा महिलाएं भी अपने बल पर आसानी से कर सकती है। विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में मशरूम की खेती से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
भारत के विभिन्न इलाकों में इसकी 12 प्रजातियों का उत्पादन होता है, जिनमें प्रमुख है- फ्लैबूलेंट्स, ओपनशियाई, इओस, डिजेमार, ढींगरी, पुराल आदि । मशरूम की खेती  कृत्रिम रूप से तैयार किये गए कम्पोस्ट  पर की जाती है। मशरूम-कम्पोस्ट बनाना एक जटिल प्रक्रिया है। कम्पोस्ट बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला भूसा एक साल से अधिक पुराना अथवा बारिश में भीगा नहीं होना चाहिए। मशरूम उत्पादन के लिए अलग-अलग वातावरण की आवश्यकता होती है। अधिकतर मशरूमों का उत्पादन जाड़ों के  दिनों में ही होता है। मशरूम उत्पादन के लिए जलवायु का खास महत्व है, अतः किसान या स्वरोजगार अपनाने वाले इसे कतई नजरअंदाज न करें। जब आपका यह रोजगार शुरू हो जायेगा और ठीक चलने लगेगा तो आप कई और जरूरतमंदों को भी रोजगार दे सकते हैं। वास्तव में यह एक ऐसा रोजगार है जिसमें समूचे परिवार को घर बैठे रोजगार मिल जाता है। 
मशरूम का उत्पादन शुरू करने से पहले तकनीकी जानकारी हासिल करना बहुत जरुरी है। तकनीकी हुनर से ही अच्छा उत्पादन किया जा सकता है। इसके लिए आप विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों से कोर्स कर सकते हैं। कोर्स करने के बाद आप थोड़े से प्रयासों से अप्रत्याशित परिणाम हासिल कर सकते हैं। 

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