अगरबत्ती एक बत्ती है जिसे जलाने पर धुँआ निकलता है। अगरबत्ती का स्वरोजगार आजकल खूब फल-फूल रहा है।अगरबत्ती का उपयोग लगभग प्रत्येक भारतीय घर, दुकान तथा पूजा-अर्चना के स्थान पर अनिवार्य रूप से किया जाता है। सुबह की दिनचर्या प्रारंभ करने से पहले प्रत्येक घर में अगरबत्ती जलाई जाती है, जो इस उत्पाद की व्यापक खपत को दर्शाता है।घर बैठी महिलाओं के लिए यह स्वरोजगार कमाई का उम्दा जरिया बन चुका है।
अगरबत्ती उद्योग को शुरू करने के लिए आपको डिग्री-डिप्लोमा की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके लिए व्यवहारिक ज्ञान और इस क्षेत्र से सम्बंधित कुछ जानकारी की ही जरुरत पड़ती है। अगरबत्ती के निर्माण की प्रक्रिया बहुत आसान है तथा घर में ही कम पूंजी तथा बिना किसी मशीन के प्रयोग के यह उद्योग स्थापित की जा सकती है। यह उधोग अनेक शिक्षित बेरोजगार युवकों के लिए जीविकोपार्जन का साधन बन सकता है। यह पूरी तरह से प्रदूषण रहित लघु कुटीर व्यवसाय है। खुली जगहों पर इसे न करें क्योंकि अगरबत्ती की खुसबू के उड़ने का डर रहता है। इस व्यवसाय के लिए कच्चे माल की आवश्यकता पड़ेगी जैसे- सुगंधित तेल, लकड़ी, सफेद चंदन, लकड़ी का कोयला आदि। इनमें सर्वप्रथम सफेद चंदन तथा लकड़ी के कोयले को अच्छी तरह पीस लिया जाता है तथा इसकी लेई बना ली जाती है। इस गूंथे हुए मसाले को बांस की तीलियों पर लगाया जाता है। तीलियों पर मसाला लगाने के अनेक तरीके प्रचलन में है। एक तरीके के अनुसार एक हाथ में हथेली पर मसाला लेकर उसपर तीली घुमती हुए मसाला तीली पर चढ़ा दिया जाता है। इसी प्रकार एक दूसरे तरीके में मसाले में से जरा सी गोली को बेलते हुए तीलियों पर मसाला चढ़ा दिया जाता है। बांस की तीलियाँ बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इन तीलियों पर लगा मसाला सूख जाने के बाद इन्हें सुगंधित अगरबत्तियां बनाने के लिए मसाला लगाने के उपरांत या तो इन अगरबत्तियों को एक सुगंधित मिश्रण में डुबोया जाता है या उस पर वह मिश्रण छिड़क दिया जाता है।
अगरबत्ती उद्योग को शुरू करने के लिए आपको डिग्री-डिप्लोमा की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसके लिए व्यवहारिक ज्ञान और इस क्षेत्र से सम्बंधित कुछ जानकारी की ही जरुरत पड़ती है। अगरबत्ती के निर्माण की प्रक्रिया बहुत आसान है तथा घर में ही कम पूंजी तथा बिना किसी मशीन के प्रयोग के यह उद्योग स्थापित की जा सकती है। यह उधोग अनेक शिक्षित बेरोजगार युवकों के लिए जीविकोपार्जन का साधन बन सकता है। यह पूरी तरह से प्रदूषण रहित लघु कुटीर व्यवसाय है। खुली जगहों पर इसे न करें क्योंकि अगरबत्ती की खुसबू के उड़ने का डर रहता है। इस व्यवसाय के लिए कच्चे माल की आवश्यकता पड़ेगी जैसे- सुगंधित तेल, लकड़ी, सफेद चंदन, लकड़ी का कोयला आदि। इनमें सर्वप्रथम सफेद चंदन तथा लकड़ी के कोयले को अच्छी तरह पीस लिया जाता है तथा इसकी लेई बना ली जाती है। इस गूंथे हुए मसाले को बांस की तीलियों पर लगाया जाता है। तीलियों पर मसाला लगाने के अनेक तरीके प्रचलन में है। एक तरीके के अनुसार एक हाथ में हथेली पर मसाला लेकर उसपर तीली घुमती हुए मसाला तीली पर चढ़ा दिया जाता है। इसी प्रकार एक दूसरे तरीके में मसाले में से जरा सी गोली को बेलते हुए तीलियों पर मसाला चढ़ा दिया जाता है। बांस की तीलियाँ बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इन तीलियों पर लगा मसाला सूख जाने के बाद इन्हें सुगंधित अगरबत्तियां बनाने के लिए मसाला लगाने के उपरांत या तो इन अगरबत्तियों को एक सुगंधित मिश्रण में डुबोया जाता है या उस पर वह मिश्रण छिड़क दिया जाता है।
उधमी सुगंध के संदर्भ में अपनी पसंद का कोई और फार्मूला अथवा किसी और प्रकार की सुगंध का इस्तेमाल भी कर सकता है। साधारणतया अगरबत्तियों की पैकिंग 10-10 तीलियों की संख्या में चौकोर डिब्बों में की जाती है।

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