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Friday, 18 July 2014

डेयरी उद्योग- मशीन मिल्किंग प्रणाली


डेयरी व्यवसाय के बारे में हम पहले भी चर्चा कर चुके हैं। आज इस व्यवसाय से जुड़ी कुछ नई बातें बता रहा हूँ, जिससे आपके डेयरी व्यवसाय में समय, पैसे और श्रम शक्ति की काफी बचत होगी। आधुनिक मशीन मिल्किंग प्रणाली का सर्वप्रथम उपयोग डेनमार्क व नीदरलैंड में हुआ। आजकल यह प्रणाली दुनियाभर के हजारों डेयरी फार्मों द्वारा उपयोग में लायी जा रही है। मशीन मिल्किंग का एक छोटा मॉडल भी है जिसे 10 से भी कम पशुओं के लिए सुगमता से उपयोग में लाया जा सकता है। मशीन मिल्किंग में पशुओं की थन कोशिकाओं को कोई कष्ट नहीं होता जिससे दूध की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि होती है।
मशीन मिल्किंग की कार्य प्रणाली बहुत सरल है, यह पहले तो निर्वात द्वारा स्ट्रीक नलिकाओं को खोलती है जिससे दूध थन में आ जाता है जहाँ से यह निकास नाली में पहुँच जाता है। यह मशीन थन मांसपेशियों की अच्छी तरह मालिश भी करती है जिससे थनों में रक्त प्रवाह सामान्य बना रहता है। मशीन मिल्किंग द्वारा दूध निकालते हुए गाय को वैसा ही अनुभव होता है, जैसा की बछड़े को दूध पिलाते समय होता है।
मशीन द्वारा लगभग 1.5 से 2.0 लीटर तक दूध प्रति मिनट दुहा जा सकता है। इसमें न केवल समय व ऊर्जा की बचत होती है बल्कि स्वच्छ दुग्ध दोहन द्वारा उच्च गुणवत्ता का दूध मिलता है। यदि दिन दो बार की अपेक्षा तीन बार दूध निकला जाए तो 20 % तक अधिक दूध प्राप्त हो सकता है। दूध में किसी प्रकार की बाहरी अशुद्धि जैसे धूल, तिनके, बाल, गोबर अथवा मूत्र मिलने की कोई संभावना नहीं रहती। इस प्रक्रिया में ग्वाले के खाँसने व छींकने से फैलने वाले प्रदुषण की संभावना भी नहीं रहती। गायों के बड़े झुंडों में हाथ द्वारा दूध दुहने में समय अधिक लगता है तथा दूध निकालने वाले ग्वाले की मजदूरी भी अधिक होती है। आजकल बड़े एवं आधुनिक डेयरी फार्मों में दूध दुहने के लिए मशीन मिल्किंग पद्धति अपनाई जाती है। मशीन मिल्किंग द्वारा समय कम लगने के साथ-साथ मजदूरी पर भी कम खर्च आता है। 
आजकल मिल्किंग मशीनें कई मॉडलों में उपलब्ध है जैसे एक-दो बाल्टी वाले साधारण अथवा बड़े डेयरी फार्म हेतु अचल मशीनें जिसे केवल मिल्किंग बायर में ही लगाया जा सकता है।

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