डेयरी पालन उद्योग में दुधारू पशुओं को पाला जाता है। इनमें गाय, भैंस व बकरी उल्लेखनीय है। भैंस और गाय की अपेक्षा बकरी का दूध मात्रा में कम होता है। भैंस और विदेशी नस्ल की गायें ज्यादा मात्रा में दूध देती है। भारत में 32 तरह की गायें पाई जाती है। डेयरी में गाय पालने की मुख्य रूप से तीन प्रजातियाँ है- रेड सिन्धी साहीवाल व गिर, जो सबसे ज्यादा दूध देती है (अक्सर डेयरी पालकों को इस नस्ल के बारे में कम जानकारी होती है)। इसके अलावा जरसी, ब्राउन स्विर होल्स्टन और अयरशायर भी प्रमुख है। जरसी मूलतः अमेरिका में पाई जाती है, होल्स्टन होलैंड में और ब्राउन स्विट्जरलैंड में पाई जाती है।
भारत में 55 प्रतिशत दूध भैंस से मिलता है। भारत में तीन तरह की भैंसें मिलती है, जिनमें मुरहा, मेहसना और सुरति प्रमुख है। मुरहा भैसों की प्रमुख ब्रीड मानी जाती है। यह ज्यादातर पंजाब और हरियाणा में पाई जाती है। मेहसना मिक्सब्रीड है और यह गुजरात और महाराष्ट्र में पाई जाती है। इस नस्ल की भैंस 1200 से 3500 लीटर दूध एक महीने में देती है। सुरति इनमें छोटी नस्ल की भैंस है। यह नस्ल भी गुजरात में पाई जाती है। यह एक महीने में 1600 से 1800 लीटर दूध देती है। डेयरी पालन के लिए यह जरुरी है कि गाय व भैंसों को खुली जगह में रखा जाए, लेकिन जाड़ों में बचाव के लिए उनके लिए घर बना हो। कमरों में हवा का आवागमन होता रहे।
भारत में 55 प्रतिशत दूध भैंस से मिलता है। भारत में तीन तरह की भैंसें मिलती है, जिनमें मुरहा, मेहसना और सुरति प्रमुख है। मुरहा भैसों की प्रमुख ब्रीड मानी जाती है। यह ज्यादातर पंजाब और हरियाणा में पाई जाती है। मेहसना मिक्सब्रीड है और यह गुजरात और महाराष्ट्र में पाई जाती है। इस नस्ल की भैंस 1200 से 3500 लीटर दूध एक महीने में देती है। सुरति इनमें छोटी नस्ल की भैंस है। यह नस्ल भी गुजरात में पाई जाती है। यह एक महीने में 1600 से 1800 लीटर दूध देती है। डेयरी पालन के लिए यह जरुरी है कि गाय व भैंसों को खुली जगह में रखा जाए, लेकिन जाड़ों में बचाव के लिए उनके लिए घर बना हो। कमरों में हवा का आवागमन होता रहे।
यह उद्योग 5 से 10 गाय या भैंस के साथ शुरू किया जा सकता है। गाय या भैसों को एक निश्चित समय पर भोजन दिया जाना जरुरी है। रोजाना खली में मिला चारा दो वक़्त दिया जाना चाहिए। इसके अलावा बरसीम, ज्वर व बाजरे का चारा दिया जाना चाहिए। दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए बिनौले का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यह भी ध्यान रखे की आहार बारीक़, साफ-सुथरा हो, ताकि जानवर अपने आहार को चाव से खा सके। इन्हें 32 लीटर पानी अवश्य पिलाया जाए। इनके स्वास्थ्य के लिए इतना पानी जरुरी है।
डेयरी पालकों को चाहिए कि वे दर्द निवारक दवाओं को अपने पास रखें, ताकि जरुरत पर उनका उपयोग किया जा सके। गाय व भैंसों को अलग-अलग खूंटों में बांधना चाहिए, तंग जगह में पशुओं को बीमारी होने का डर रहता है। इसलिए समय-समय पर पशु-चिकित्सकों से भी सलाह लेते रहना चाहिए।
डेयरी पालकों को चाहिए कि वे दर्द निवारक दवाओं को अपने पास रखें, ताकि जरुरत पर उनका उपयोग किया जा सके। गाय व भैंसों को अलग-अलग खूंटों में बांधना चाहिए, तंग जगह में पशुओं को बीमारी होने का डर रहता है। इसलिए समय-समय पर पशु-चिकित्सकों से भी सलाह लेते रहना चाहिए।

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