हाल ही में सरकार ने यह साफ़ कर दिया की बांस पेड़ नहीं बल्कि घास की श्रेणी में आते है। अतः उसे काटने के लिए वन विभाग से अनुमति लेने की जरुरत नहीं होगी। सरकार की इस पहल से उन लोगों को राहत पहुंची है जो बांस उत्पाद के माध्यम से रोजगार हासिल कर रहे है।
बांस के बने उत्पाद वास्तव में इको फ्रेंडली होते है। इसे प्लास्टिक के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। यही वजह है की देश और विदेशों में बांस के बने उत्पादों की मांग में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। बढती मांग ने लोगों को इस क्षेत्र में रोजगार के साधन उपलब्ध कराएँ है। तीन से छह महीने के प्रशिक्षण के बाद हेंडीक्राफ्ट सामान बनाने का गुर सीख कर खुद का रोजगार शुरू किया जा सकता है। बांस से बनाए डस्टबिन, घरों के सजावटी सामान और फर्नीचर की मांग महानगरों में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब हो रही है।
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